सारंगढ़। सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम सालर के बरनाहा पारा मोहल्ले में वन विभाग की कार्यवाई को लेकर शनिवार दोपहर करीब 2 बजे ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बीट क्रमांक 929 के परिसर रक्षक खेमनाथ कर्ष अपनी टीम के साथ कथित रूप से डीएफओ के मौखिक आदेश का हवाला देते हुए प्यूआर (प्रकरण) बनाने घर-घर पहुंचे।
इस दौरान मोहल्ले के लोगों ने आपत्ति जताते हुए लिखित आदेश दिखाने या संबंधित अधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग की। आरोप है कि इसी बीच बीट गार्ड द्वारा प्यूआर फाड़ना शुरू कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया।
गुस्साए ग्रामीणों ने बीट गार्ड और फायर वॉचर को एक घर में बैठा लिया और स्पष्ट कहा कि जब तक अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे, उन्हें जाने नहीं दिया जाएगा। ग्रामीण भी उनके साथ वहीं डटे रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले लगभग 40 वर्षों से इस मोहल्ले में निवास कर रहे हैं और अब तक वन विभाग द्वारा इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। उनका यह भी दावा है कि उन्होंने वन भूमि के अधिकार पत्र के लिए ग्रामसभा के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन उसे “राजस्व भूमि, प्रचलित आबादी एवं संरक्षित आबादी” बताते हुए निरस्त कर दिया गया।
इधर, घटना की सूचना मिलते ही वन मंडलाधिकारी को अवगत कराया गया। इसके बाद गोमर्डा अभ्यारण के अधीक्षक, परिक्षेत्र अधिकारी और कनकबीरा चौकी पुलिस मौके पर पहुंचे और समझाइश देकर स्थिति को शांत कराया।
मामले ने उठाए कई सवाल
यह घटना एक बार फिर वन भूमि अधिकार, ग्रामीणों के दावे और विभागीय कार्रवाई के बीच टकराव को उजागर करती है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
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