सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय का केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर स्थानांतरण जिले के लिए केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है। अपने कार्यकाल में उन्होंने जिस ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और न्यायप्रियता के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, उसने उन्हें जनता के बीच एक लोकप्रिय एवं भरोसेमंद अधिकारी के रूप में स्थापित किया।
उन्होंने यह सिद्ध किया कि एक सच्चा पुलिस अधिकारी केवल कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं होता, बल्कि आमजन के दिलों में विश्वास भी पैदा करता है। श्री वार्ष्णेय ने कभी अमीर-गरीब, प्रभावशाली और सामान्य व्यक्ति के बीच भेदभाव नहीं किया। हर पीड़ित को न्याय दिलाने की उनकी कार्यशैली ने पुलिस व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत किया।
उनकी स्पष्ट सोच और निर्भीक कार्यशैली के कारण दबाव बनाने वाले और बेईमान तत्व भी उनके सामने टिक नहीं पाते थे। उनका एक ही सिद्धांत था —“गलत न सहूंगा और न ही करूंगा, चाहो तो ट्रांसफर करा दो।”
पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने जिले के लगभग हर थाना और चौकी का निरीक्षण कर पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य किया। उन्होंने विशेष रुचि के साथ चौकी कनकबीरा एवं थाना केड़ार के भवन निर्माण तथा कर्मचारी कॉलोनियों के निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा।
अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, शालीनता और निष्पक्षता उनकी पहचान रही। साइबर अपराधों की रोकथाम, सामुदायिक पुलिसिंग और जनसहभागिता आधारित पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने में उनकी विशेष भूमिका रही।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ की जनता ऐसे अधिकारी को लंबे समय तक याद रखेगी, जिन्होंने पद से अधिक अपने कर्मों से सम्मान अर्जित किया। उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के अधिकारियों तथा समाज दोनों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
