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May 11, 2026 10:42 pm

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वन पट्टा धारी किसानों के खाद-बीज और केसीसी लाभ पर मंडराया संकट

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Ramkumar Thuriya

सारंगढ़। शासन द्वारा किसानों का एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य किए जाने के बाद जिले के हजारों वन अधिकार पट्टा धारी किसान गंभीर तकनीकी समस्या से जूझ रहे हैं। वन अधिकार पट्टों में खसरा संबंधी आवश्यक जानकारी जैसे कंपार्टमेंट नंबर दर्ज नहीं होना तथा भूमि की मैपिंग लंबित रहने के कारण किसानों का एग्रीस्टेक पंजीयन पूरा नहीं हो पा रहा है। इससे किसानों में भारी चिंता और असंतोष व्याप्त है।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि शासन की मंशा किसानों को योजनाओं से जोड़ने की है, लेकिन तकनीकी त्रुटियों और रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने के कारण वास्तविक पात्र किसान ही लाभ से वंचित होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। एग्रीस्टेक पंजीयन के दौरान भूमि का डिजिटल सत्यापन आवश्यक किया गया है, जिसमें कंपार्टमेंट नंबर एवं मैपिंग की जानकारी नहीं होने से आवेदन निरस्त अथवा लंबित हो रहे हैं।
किसानों ने बताया कि वन अधिकार पट्टा मिलने के वर्षों बाद भी अनेक पट्टों में राजस्व एवं वन विभाग के अभिलेखों का समन्वय नहीं हो पाया है। कई गांवों में किसानों की जमीन का सीमांकन और डिजिटल मैपिंग अधूरी है। परिणामस्वरूप किसान खाद-बीज वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), फसल ऋण एवं अन्य कृषि योजनाओं के लाभ से वंचित होने की आशंका जता रहे हैं।
ग्रामीणों एवं किसान प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि वन अधिकार पट्टा धारियों के लिए विशेष अभियान चलाकर रिकॉर्ड सुधार, कंपार्टमेंट नंबर अंकन एवं भूमि मैपिंग का कार्य तत्काल पूरा कराया जाए। साथ ही एग्रीस्टेक पंजीयन में तकनीकी बाधाओं को दूर करने हेतु शिविर आयोजित कर किसानों को राहत दी जाए।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो खरीफ सीजन में हजारों वन पट्टा धारी किसान खाद, बीज और कृषि ऋण जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे, जिसका सीधा प्रभाव खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग एवं वन विभाग से समन्वय स्थापित कर शीघ्र समाधान निकालने की अपील की है, ताकि वन अधिकार कानून के तहत भूमि प्राप्त किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

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