सारंगढ़। सारंगढ़ विकासखंड के संकुल केंद्र अमलीपाली ‘ब’ अंतर्गत आने वाले प्राथमिक शाला भाटाकोना की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां शिक्षा व्यवस्था की बदहाली इस कदर है कि बच्चों को स्कूल भवन के अभाव में रसोईघर में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, स्कूल की मुख्य भवन की छत से लगातार प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, जिससे किसी भी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। इसी खतरे को देखते हुए शिक्षक बच्चों की सुरक्षा के लिए किचन रूम में ही पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी एक कमरे में शिक्षकों का कार्यालय भी चल रहा है।
बारिश के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है। जहां एक ओर इसी रसोईघर में बच्चों की पढ़ाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर मध्यान्ह भोजन तैयार करने में भी भारी परेशानी आती है। इससे न सिर्फ शिक्षा प्रभावित हो रही है बल्कि भोजन व्यवस्था भी बाधित हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्कूल पिछले 11 वर्षों से जर्जर अवस्था में संचालित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। स्कूल में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, तो आखिर भाटाकोना जैसे ग्रामीण स्कूल आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित क्यों हैं?
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी जल्दी संज्ञान में लेकर बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा वातावरण उपलब्ध कराता है।

