सारंगढ़। सारंगढ़ विकासखंड अंतर्गत संकुल केंद्र अमलीपाली ‘ब’ के कई स्कूलों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। बगबंध, नवापाली, गोमर्डा, लूरका, जवाहरनगर और भाटाकोना के स्कूलों में ट्यूबवेल सूख जाने के कारण बच्चों और शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार इन स्कूलों में पेयजल के लिए लगाए गए ट्यूबवेल जलस्तर गिरने के कारण बंद पड़े हैं, जिससे छात्र-छात्राओं के सामने पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है। सबसे चिंताजनक स्थिति बगबंध गांव के प्राथमिक शाला में देखने को मिल रही है, जहां हैंडपंप में पानी तो उपलब्ध है, लेकिन बारिश के दौरान जमीन में नमी आने से उसमें करंट उतरने की शिकायत सामने आई है। इससे बच्चों और शिक्षकों की जान जोखिम में पड़ गई है और पानी भरना भी खतरे से खाली नहीं है।
वहीं, आश्रम शाला गोमर्डा और जवाहरनगर में लगे सोलर पंप जलस्तर घटने के कारण बंद पड़े हुए हैं, जिससे वहां भी पानी की आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित है। दूसरी ओर लूरका गांव में स्थापित सोलर पंप को सौर ऊर्जा विभाग द्वारा अपने कार्यालय ले जाकर रख दिया गया, लेकिन आज तक उसे दोबारा स्थापित नहीं किया गया है। इससे ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन में नाराजगी है।
इसी तरह भाटाकोना में स्थापित सोलर टंकी तेज आंधी-तूफान में क्षतिग्रस्त होकर उड़ गई, लेकिन विभाग द्वारा अब तक उसकी मरम्मत या पुनर्स्थापना की कोई पहल नहीं की गई। यह लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर सीधा असर डाल रही है।
ग्रामीणों और पालकों का कहना है कि एक ओर सरकार स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत पूरी तरह विपरीत नजर आ रही है। बच्चों को पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग और प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी बड़ी दुर्घटना या बच्चों की तबीयत बिगड़ने का इंतजार किया जा रहा है? क्षेत्रवासियों ने तत्काल पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने और खराब सोलर पंपों की मरम्मत की मांग की है।

