सारंगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में बुधवार शाम लगभग 4 बजे आए तेज आंधी-तूफान एवं बारिश ने व्यापक तबाही मचाई। जिले के कई गांवों में सैकड़ों पेड़ टूटकर गिर गए, जिससे विद्युत व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। अनेक क्षेत्रों में लोग बीते तीन दिनों से बिजली और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी लगातार दिन-रात मेहनत कर पेड़ों को हटाने और बिजली बहाल करने में जुटे हुए हैं, किन्तु कई स्थानों पर अब भी बिजली खंभों और तारों पर गिरे पेड़ों को पूरी तरह हटाया नहीं जा सका है।
इस भयावह प्राकृतिक आपदा के कारण सीमेंट चादर एवं कच्चे मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई परिवारों के घर उजड़ गए हैं और गरीब तबके के लोगों को आर्थिक रूप से गंभीर क्षति हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के घरेलू सामान, पशु आश्रय और अन्य संपत्तियां भी प्रभावित हुई हैं।
वहीं दूसरी ओर, राजस्व विभाग द्वारा अब तक व्यापक स्तर पर क्षति का सर्वे एवं आंकलन प्रारंभ नहीं किए जाने से प्रभावित परिवारों में निराशा देखी जा रही है। जानकारी के अभाव में अनेक पीड़ित परिवार शासन द्वारा आरबीसी 6/4 के तहत मिलने वाली राहत सहायता हेतु आवेदन भी प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष रामकुमार थूरिया ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभावित गांवों में राजस्व अमले की टीम भेजकर घर-घर सर्वे कराया जाए तथा पीड़ित परिवारों को राहत सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल और तेज की जाए। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर मुनादी एवं जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार सहायता से वंचित न रहे।
उन्होंने आमजन से भी अपील की है कि जिन परिवारों के घर अथवा संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, वे अपने संबंधित हल्का पटवारी एवं तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर शासन की राहत योजना का लाभ अवश्य लें।
प्राकृतिक आपदा के इस कठिन समय में प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित राहत कार्य ही पीड़ित परिवारों के लिए सबसे बड़ा सहारा साबित होगा।


